जिम्बाब्वे का केंद्रीय बैंक, Reserve Bank of Zimbabwe (RBZ), भारत की National Payments Corporation of India (NPCI) की अंतरराष्ट्रीय सहायक कंपनी NPCI International Payments Limited (NIPL) के साथ UPI जैसी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली विकसित करने को लेकर बातचीत कर रहा था। 6 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जिम्बाब्वे के केंद्रीय बैंक के गवर्नर John Mushayavanhu ने बताया था कि बातचीत 31 अक्टूबर तक पूरी हो सकती है। यह संभावित समयसीमा थी, अंतिम समझौते या सिस्टम लॉन्च की घोषित तारीख नहीं।
प्रस्तावित भुगतान प्रणाली क्या है?
प्रस्ताव के तहत बैंकों, मोबाइल-मनी ऑपरेटरों, फिनटेक कंपनियों और दूसरे भुगतान सेवा प्रदाताओं को साझा तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने की योजना है। इसका उद्देश्य अलग-अलग भुगतान प्रदाताओं के बीच लेनदेन को अधिक सुगम बनाना और रियल-टाइम भुगतान की सुविधा विकसित करना है।
जिम्बाब्वे के केंद्रीय बैंक के गवर्नर के अनुसार, ऐसी व्यवस्था से भुगतान की लागत कम करने और लेनदेन की गति बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेंगे कि अंतिम समझौता किन शर्तों पर होता है और प्रणाली किस तरह लागू की जाती है।
क्या जिम्बाब्वे में सीधे UPI शुरू होने वाला है?
प्रस्ताव का उद्देश्य केवल भारतीय यात्रियों को विदेश में UPI से भुगतान की सुविधा देना नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, जिम्बाब्वे UPI तकनीक पर आधारित साझा घरेलू भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की संभावना पर विचार कर रहा था।
इसका अर्थ यह नहीं है कि जिम्बाब्वे में UPI जैसी प्रणाली शुरू हो चुकी है। उपलब्ध रिपोर्ट में बातचीत की जानकारी दी गई थी; किसी अंतिम समझौते या परिचालन शुरुआत की पुष्टि नहीं की गई थी।
बैंकों और कारोबारों को क्या संभावित लाभ हो सकते हैं?
यदि प्रस्तावित व्यवस्था पर समझौता होता है और इसे सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो इससे विभिन्न भुगतान प्रदाताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिल सकती है। रिपोर्ट में निम्नलिखित संभावित लाभों का उल्लेख किया गया था:
- तेज भुगतान: वित्तीय संस्थानों के बीच लेनदेन को रियल-टाइम में संसाधित करने की संभावना।
- लागत कम करने का उद्देश्य: घरेलू खाते से खाते में भुगतान को अधिक किफायती बनाने की कोशिश।
- व्यापारियों के लिए सुविधा: भुगतान सेवाओं की लागत घटने पर कारोबारियों को लाभ मिलने की संभावना।
- नए वित्तीय उत्पाद: साझा इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर बैंक और फिनटेक कंपनियाँ नई सेवाएँ विकसित कर सकती हैं।
ये प्रस्तावित व्यवस्था के संभावित लाभ हैं। वास्तविक परिणामों का आकलन अंतिम समझौते, तकनीकी कार्यान्वयन और सेवा प्रदाताओं की भागीदारी के बाद ही किया जा सकेगा।
क्या इससे अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर भी शुरू होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, जिम्बाब्वे भविष्य में इस प्रणाली को सीमा पार भुगतान और विदेश से भेजे जाने वाले धन (remittances) तक विस्तारित करने पर विचार कर सकता है। हालांकि, ये संभावनाएँ तत्काल प्रस्तावित व्यवस्था के घोषित दायरे का हिस्सा नहीं थीं।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि भारत और जिम्बाब्वे के बीच UPI आधारित अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर सेवा शुरू हो चुकी है। इसके लिए अलग व्यवस्था, तकनीकी आवश्यकताओं और संबंधित पक्षों की स्वीकृति की जरूरत हो सकती है।
NPCI International क्या है?
NPCI International Payments Limited (NIPL), National Payments Corporation of India (NPCI) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। इसकी स्थापना अप्रैल 2020 में भारतीय भुगतान समाधानों, जिनमें UPI और RuPay शामिल हैं, को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तारित करने के उद्देश्य से की गई थी।
NIPL की गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय भुगतान समाधानों के बारे में जानकारी के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
अभी तक क्या स्पष्ट है?
- जिम्बाब्वे का केंद्रीय बैंक NPCI International के साथ UPI जैसी भुगतान तकनीक पर बातचीत कर रहा था।
- प्रस्तावित व्यवस्था बैंकों, मोबाइल-मनी ऑपरेटरों और फिनटेक कंपनियों को साझा इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने के लिए है।
- 31 अक्टूबर 2026 तक बातचीत पूरी होने की संभावना रिपोर्ट की गई थी; यह निश्चित समयसीमा या लॉन्च की तारीख नहीं थी।
- उपलब्ध रिपोर्ट में अंतिम हस्ताक्षरित समझौते या सेवा शुरू होने की पुष्टि नहीं थी।
- अंतरराष्ट्रीय भुगतान और remittances को भविष्य में विस्तार के संभावित विकल्प के रूप में बताया गया था।
महत्वपूर्ण स्रोत
- Moneycontrol: जिम्बाब्वे की UPI तकनीक अपनाने के लिए बातचीत
- Bloomberg: जिम्बाब्वे के केंद्रीय बैंक की NPCI के साथ संभावित व्यवस्था
- NPCI International की आधिकारिक वेबसाइट
फिलहाल इस विषय को प्रस्तावित भुगतान व्यवस्था और जारी बातचीत के रूप में समझना चाहिए। अंतिम समझौते, तकनीकी कार्यान्वयन और सेवा की शुरुआत से जुड़ी जानकारी मिलने पर ही इसे पूर्ण हुए प्रोजेक्ट के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।


